उन्मेष गुजराथी
स्प्राऊट्स एक्सक्लूसिव
मुंबई बीजेपी अध्यक्ष और विधायक आशिष शेलार के करीबी और विश्वासपात्र सहकारी, जो मुंबई बीजेपी के प्रोटोकॉल सचिव भी हैं, पर कई नागरिकों को लाखों रुपयों की धोखाधड़ी करने का आरोप लगा है। इस घोटाले की शिकायतें स्प्राऊट्स की विशेष जांच टीम (SIT) के पास पहुंची हैं।
भारत भर के कई वरिष्ठ बीजेपी नेता नियमित रूप से मुंबई आते हैं। इन यात्राओं को प्रबंधित करने के लिए, जिसमें एयरपोर्ट पर मेहमानों का स्वागत और शाही प्रोटोकॉल का पालन करना शामिल है, आशिष शेलार ने 30 नवंबर 2024 को एक प्रोटोकॉल विभाग की नियुक्ति की। इस विभाग में संतोष पांडे को मुंबई डिवीजन प्रमुख (Protocol Secretary of Mumbai BJP) के रूप में नियुक्त किया गया। पांडे लंबे समय से बीजेपी (BJP) के नाम पर लोगों को धोखा दे रहा था, और इस संबंध में कई शिकायतें वरिष्ठ नेताओं के पास गईं, लेकिन हमेशा उसे बचाया गया।
स्प्राऊट्स द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार, विक्रोली के रहने वाले आकाश रामपाल गागट (Aakash Rampal Gagat) भी पांडे (Adv. Santosh Pandey) के धोखाधड़ी का शिकार बने। गागट के बचपन के दोस्त विवेक वीरेंद्र सिंह ने उन्हें पांडे से मिलवाया, और कहा, “संतोष पांडे एक बड़े व्यापारी हैं, अगर आप उनके साथ पैसा लगाते हैं, तो अच्छा खासा मुनाफा होगा।” हालांकि, सिंह ने यह भी बताया कि पांडे को आयकर विभाग से समस्या है, इसलिए पैसे उनके खाते में ट्रांसफर करने होंगे। गागट ने अपने दोस्त पर विश्वास करते हुए ₹3,62,700 विवेक सिंह के खाते में ट्रांसफर किए। इसके बाद पांडे ने गागट को कुछ पैसे “मुनाफा” के तौर पर दिए और यह बताया कि यह व्यापार का हिस्सा है।
गागट को मिले इस छोटे से मुनाफे से पांडे पर उनका विश्वास और बढ़ गया। दिसंबर 2021 में, विवेक सिंह (Vivek Singh) ने गागट को बताया कि पांडे का दिल्ली में बीजेपी नेताओं और सरकारी अधिकारियों से करीबी संबंध है, और वह उन्हें रेलवे या एसबीआई (SBI) में टिकट कलेक्टर या बैंक मैनेजर की नौकरी दिला सकते हैं। इसके लिए ₹37 लाख नकद की मांग की गई।

गागट ने हालांकि, यह राशि नकद देने से मना कर दिया। इसके बाद सिंह ने अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के नाम और बैंक विवरण दिए। इसके बाद, गागट ने ₹36,21,600 को विभिन्न खातों में ट्रांसफर किया, जिनमें विवेक सिंह, शैलेश सिंह, विष्णू सिंह, मंगेश सिंह, अनिल कुमार चव्हाण, धनंजय एस. बरनवाल, सुमित शिंदे, अजित चौरसिया, अश्विनी, अमन चौरसिया, अभिषेक सिंह, मनोज सिंह आदि के खाते शामिल थे। ये सभी 13 आरोपी हैं, जिनमें संतोष पांडे भी शामिल हैं।
दिसंबर 2022 में, जब गागट ने नौकरी के बारे में पूछा, तो सिंह ने उन्हें कुछ झूठे कागजात दिए, जिनमें गागट की फोटो और नौकरी की जानकारी थी। इन कागजात पर “भारतीय रेल, इंडियन रेलवे न्यू दिल्ली” के फर्जी स्टांप थे। जब गागट ने सिंह से असली कागजात के बारे में पूछा, तो उसने कहा कि वह पांडे के पास हैं। फिर सिंह ने गागट को नौकरी मिलने तक वेतन देने का वादा किया। इसके बाद सिंह ने मंगेश सिंह और विष्णू सिंह के खातों से ₹4,01,500 ट्रांसफर किए।
कुछ महीनों बाद, जब गागट ने बार-बार नौकरी के बारे में पूछा, तो सिंह और पांडे ने फोन उठाना बंद कर दिया। कागजात की प्रामाणिकता पर शक होने के बाद गागट ने उन्हें चेक किया, और यह साबित हुआ कि वे फर्जी थे। इसके बाद, गागट ने पुलिस से संपर्क किया।
शुरुआत में विक्रोली पुलिसने (Vikhroli Police Station) मामला दर्ज करने में देर की। हालांकि, गागट ने विक्रोली कोर्ट का रुख किया, जिससे जांच शुरू हुई। कोर्ट के आदेश पर, संतोष पांडे और अन्य आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। सभी आरोपी मुंबई के वरली (Worli) क्षेत्र के निवासी हैं।
पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 (धोखाधड़ी), 465 (जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी), 471 (फर्जी दस्तावेजों का असली दस्तावेज के रूप में उपयोग) और 34 (साझा इरादा) के तहत आरोप लगाए हैं। पुलिस निरीक्षक संदीप चंद्रकांत पाटिल ( Sandeep Chandrakant Patil) इस मामले की जांच कर रहे हैं। स्प्राऊट्स द्वारा संपर्क किए जाने पर, पाटिल ने पुष्टि की कि “पुलिस जांच जारी है।”
सूत्रों का कहना है कि बीजेपी के आशिष शेलार ( MLA Ashish Shelar) पुलिस पर दबाव बना रहे हैं, जिससे जांच में रुकावट आ रही है। यदि कोर्ट का हस्तक्षेप नहीं होता, तो यह मामला भी अन्य मामलों की तरह राजनीतिक दबाव के चलते दबा दिया जाता, ऐसी आशंका जताई जा रही है।
• पांडे की निष्कासन (Expulsion) की मांग
संतोष पांडे, आरोपी, अपनी बीजेपी की पदवी का दुरुपयोग कर रहा है। उसने पहले भी कई लोगों को धोखा दिया है, लेकिन विधायक आशिष शेलार के कथित दबाव के कारण पीड़ित लोग शिकायत करने से हिचकिचा रहे थे। गागट ने कानूनी कार्रवाई करने का फैसला लिया, जिसके परिणामस्वरूप आरोप दर्ज हुए, लेकिन इस समूह के अन्य कई घोटालों की भी गहन जांच होनी चाहिए।
पांडे की गतिविधियाँ बीजेपी की छवि को खराब कर रही हैं, और पीड़ितों, बीजेपी कार्यकर्ताओं और स्प्राऊट्स के प्रतिनिधियों ने दिल्ली स्थित पार्टी नेतृत्व से पांडे की तत्काल निष्कासन की मांग की है। विक्रोली का यह मामला बस हिमनग की नोक है, और ऐसे कई मामले पहले दबाए गए हैं।

